Sunday, January 6, 2008

तकदीर और महेनत

सब के घर मे उजाला
मेरे घर मे अँधेरा क्यों
सब के हाथो मे लकीरे
मेरा हाथ खाली क्यों

न झुकुगा तेरे आगे
करूँगा उजाला दीये से
जलाऊंगा दीया घर मे
अपने खून पसीने से

खिचुगा लकीरे अपने हाथो मे
मै अपनी महेनत से
होगा दुनिया मे नाम मेरा
मेरी अपनी महेनत से

न बैठे रहे बरोसे किस्मत के
मिलती है किस्मत महेनत से
परोसा हुआ खाना भी
खाना परता है हाथो से

माँ शक्ति दे इन हाथो मे
न जी चुराए कभी महेनत से
बदलूंगा तकदीर मेरी
मै पानी महेनत से

हर हाल मे जीना है - 2

हार हमारी मंजिल नही
हार के फिर हमे जीतना है
फतह हो जबतक संगर्ष हमे करना है
हमे तो हर हाल मे जीना है

मौत हमारा इरादा नही
जिन्दगी से लड़ना है
जब तक है साँस तब तक हमे जीना है
हमे तो हर हाल मे जीना है

जीना है सब के लिए
छुपाकर गम अपना
सब को हँसाना है
हमे तो हर हाल मे जीना है

देखो इस दीपक को
जलकर भी रोशन है
जलाकर खुदको कुन्दन हमे बनना है
हमे तो हर हाल मे जीना है.

Monday, December 31, 2007

नया साल


नए साल मे कुछ नया करे
आओ मिलकर यह वादा करे

दोष न देखेगे किसी और के
अपने खामियों को सुधारेगे

आओ मिलकर यह वादा करे

न लेगे रिश्वत कभी
ईमानदारी कि खायेगे

आओ मिलकर यह वादा करे

दूर करेगे दुख सभी के
बत्तेगे खुशिया जग मे

आओ मिलकर यह वादा करे

न दुखायेगे दिल किसी का
सब को प्यार बत्तेगे

आओ मिलकर यह वादा करे

धर्म इंसानियत का अपनायेगे
ईद हो या दिवाली सभी मिलकर मनायेगे

आओ मिलकर यह वादा करे


रिश्तो को मझ्बूत बनाएगे
हर रिश्ते मे मित्ताश भरेगे

आओ मिलकर यह वादा करे


मरने के बाद भी नाम अमर हो
ऐसा काम कुछ कर के जायेगे

आओ मिलकर यह वादा करे


बीत गया बातो मे गुजरा साल
न वियार्थ करेगे समये अब बातो मे

आओ मिलकर यह वादा करे

आशा

आज मै जियुगी नई उमंग से
जो बीत गया वो सपना था
बनाउंगी दुनिया अपने रंग से

आता है तैरना मुझे
क्यों करू गम उसका
जो छोड़ गया मजधार मे
बनाउंगी दुनिया अपने रंग से

बनुगी मै उस दिलबर की
जो छुएगा आत्मा मेरी
देगा दस्तक जो मन को मेरे
बनाउंगी दुनिया अपने रंग से

है इंतजार उसका
जोद्देगा जो दिल से दिल मेरा
आएगा वो फरिश्ता मेरा
बनाउंगी दुनिया अपने रंग से

बसेगा फिर से संसार मेरा
होगी किल्कारिया आगन मे मेरे
बन जाएगा स्वर्ग घर मेरा
बनाउंगी दुनिया अपने रंग से

Sunday, October 14, 2007

माँ कि याद

चाहत है बस माँ के प्यार कि
जलती तपती दुप मे माँ के आचल कि
मस्ती भरे पलों मे माँ के गोद कि
सोचा था सेवा करूगा माँ कि
दौलत कि दौर मे भूल गया माँ को
आया जब होश तो न पाया माँ को
काश एक भर वक़्त पीछे चले जाए
काश एक बार मे बचा बनू
एक बार फिर माँ के आचल से खेलु
अरज है इतनी प्रभु तुम से मेरी
पल भर लौटा दो माँ मेरी
माँ के गोद मे निकले आखरी सास मेरी

Saturday, October 6, 2007

जनम दिन का तोहफा

 जन्म दिन है तुम्हारा 
क्या तोहफा दे तुम को
हाथ उठाकर बस 
यह दुआ हम करते है

कभी गम का साया न आये तेरे द्वार
तेरी गलियों से भी रहे दुःख दूर
तेरे आगन मे हो खुशियों कि बाहर
यह दुआ हम करते है

कभी कांटा न लगे पाव मे तेरे
फूल खिले वही पर जहा पड़े कदम तेरे
सदा बहारों का मौसम रहे शहर मे तेरे
यह दुआ हम करते है

चाहेरा जैसे मासूम तेरा
वैसे मासूम हो दिल तेरा
हर पाप से रहे परे मन तेरा
यह दुआ हम करते है

जितनी भी हो जिन्दगी तुम्हारी
हर आरजू हो पूरी तुम्हारी
न रहे कमी जीवन मे तुम्हारी
यह दुआ हम करते है

नाम रहे सदा जग मे तेरा
हर दिल मे रहे प्यार तेरा
हर घर मे हो चर्चा तेरा
यह दुआ हम करते है

भूले से भी अगर आये तूफान
माँ शक्ति दे तुझे इतनी
टकरा कर तूफान भी मोड़ ले रास्ता
यह दुआ हम करते है

दुआ करो तुम भी प्रभु से इतनी
कबूल हो दुआ मेरी
मेरी दुआ का असर हो तुम पर
यह दुआ हम करते है

Saturday, September 29, 2007

माँ


मैंने पूछा बाग़ से माँ क्या है
बाग़ ने कहा माँ एक एसा गुलशन है
जिसका कोई जवाब नही

मैंने पूछा समुन्दर से माँ क्या है

समुन्दर ने कहा माँ एक एसी सीप है
जो सीने मे हजारो राज छिपाये हुए है

मैंने पूछा सूरज से माँ क्या है
सूरज ने कहा माँ एसा ब्रह्माण्ड है
जिसके आगे मे कुछ भी नही


मैंने पूछा इश्वर से माँ क्या है
इश्वर ने कहा माँ एक एसा वरदान है
जो दुनिया मे सबसे माहान है।

मैं पूछा अपने दिल से माँ क्या है
दिल ने कहा माँ ज़िन्दगी का एसा सच है
जिसके सिवाए ज़िन्दगी कुछ भी नही है