जैसे अगले अंक मे अपने आप को खुश रखने कि बात कि थी, हम खुश होगे तो किसी के सहारे बन सकेगे इसीलिये हमेशा मुश्क्रते रहेना है। मुश्क्रता हुआ चाहेरा हमेशा गुलाब कि तरह खिला रहेता है, जैसे कि रोता हुआ बचा भी कोई खिलाना नही चाहता, वैसे ही एक उदास और रोते हुए से सभी कतराते है। अपना दुःख दर्द दुनिया समाज नही सकेगी, उसे मजाक बनके हसेगी।
किशोर जी ने एक गीत मे कहा है।
जो तुम हसोगे तो दुनिया हसेगी
रोइगी तुम तो न रोइगी दुनिया
न रोइगी दुनिय;
तेरे आसुओ को समाज न सकेगी,
तेरे आसुओ पे हसेगी ये दुनिया
हसेगी ये दुनिया।
हमे जीना है, फिर हम हस्के जीए या रोके , हर हाल मे हमे जीना है , फिर कियो न हस्के जीए । अपनी हसी गुलाब कि तरह हर जगह फहेलादे ।
दिन कि शरुआत अगर मुस्कराने से हो तो पुरा दिन खुसी से बीत इसीलिये जब हम नीद से जागें तो मुस्क्रके उठे । मुस्कराते चहरे तो दर्पन मे देखे, अपने आप को मुश्क्रते देख कर, शारीर मे अजीब सी शक्ति उत्पन होगी । इस शक्ति को बहार निकलना है ।
अगले भाग मे
Monday, August 6, 2007
Saturday, August 4, 2007
हमारा जीवन
हमारा जीवन बहुत ही संघर्ष से भरा है, बचपन से लेकर समय बड़ा कठिन है, जीने हमे सरल बनाना है, जीवन मे दुःख सुख आते रहेते है पर दुखो को लेकर अपना जीवन नस्ठ न करे। हम इस धरती पर आये है तो उसका कोई मकसद तो होगा। हर कोई किसी न किसी मुक्साद को लेकर याहा आया है। हमे अपने आप को पहेचन ना है, हमे किया करना है , हमारे जो रस्ते मे काटे है उसे निकलना है, और आगे बढ़ना है। परेशानेयो को लेकर परेशां न न होकर रास्ता निकलना है।
सबसे पहेले हमे अपने आप को खुश रखना है, हम खुश रहेगे तो हम अपने जीवन का दियेये खोज सकेगे।
अगले अंक मे
सबसे पहेले हमे अपने आप को खुश रखना है, हम खुश रहेगे तो हम अपने जीवन का दियेये खोज सकेगे।
अगले अंक मे
Thursday, July 19, 2007
खुशिया
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
दिल मे हो दर्द फिर भी खुशिया मनायेगे
खिलायेगे फूल जगह जगह
न खिले फूल तो काटो को सहेलायेगे
कागज़ के फूलो से खुश्ब्हू हम फहेलायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
खली हाथ आयेथ न जायेगे खली हाथ
दामन खुशियोका भर के ले जायेगे साथ
बातेगे खुशिया जनत मे , नरक को स्वर्ग बनायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
दिल मे हो दर्द फिर भी खुशिया मनायेगे
खिलायेगे फूल जगह जगह
न खिले फूल तो काटो को सहेलायेगे
कागज़ के फूलो से खुश्ब्हू हम फहेलायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
खली हाथ आयेथ न जायेगे खली हाथ
दामन खुशियोका भर के ले जायेगे साथ
बातेगे खुशिया जनत मे , नरक को स्वर्ग बनायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
Tuesday, July 17, 2007
जीं भरके जीं ले
आज एक बार फिर सूरज को देखा
चांद को चांदनी रात मे जागते देखा
कल हम हो न हो पर
चांद सूरज हमेशा रहेंगे
आज एक बार सबसे मुस्क्राके बात कि
बिताये हुये पलो को साथ साथ याद किया
कल पुराने पल याद हो न हो
पर हम सदा याद रहेगे
कल जो होना हो वोह होगा
कल कि फिकर क्यो करे
आज तो जीं भरके जीं ले
कल जो होगा देखा जाएगा
चांद को चांदनी रात मे जागते देखा
कल हम हो न हो पर
चांद सूरज हमेशा रहेंगे
आज एक बार सबसे मुस्क्राके बात कि
बिताये हुये पलो को साथ साथ याद किया
कल पुराने पल याद हो न हो
पर हम सदा याद रहेगे
कल जो होना हो वोह होगा
कल कि फिकर क्यो करे
आज तो जीं भरके जीं ले
कल जो होगा देखा जाएगा
Wednesday, July 11, 2007
शुक्रिया
कहेनी थी एक बात जो बद होतो मे रह् गई
नीद से जगाकर वोह खुद सो गए
कहेनो को तो किया था एक नजर का इशारा था
साथ दिया जो तुने उसका शुक्रिया था
ख़ुशी गामी मे निभाया है तुने साथ
न गिरने दिया मुज्को सदा थमा है हाथ
भर आई जब पलके तो पल्को को चूम लिया
गले लगाकर मेरा सारा दर्द ले लिया
नीद से जगाकर वोह खुद सो गए
कहेनो को तो किया था एक नजर का इशारा था
साथ दिया जो तुने उसका शुक्रिया था
ख़ुशी गामी मे निभाया है तुने साथ
न गिरने दिया मुज्को सदा थमा है हाथ
भर आई जब पलके तो पल्को को चूम लिया
गले लगाकर मेरा सारा दर्द ले लिया
Saturday, June 30, 2007
प्यार
प्यार करते है तुम्हें, यह इकरार हम करते है
निभाएगे प्यार सदा, यह वादा हम करते है
प्यार तुम करो मुझसे, यह जरुरी नही
प्यार तो प्यार है कोई समजोता नही
रिश्तो मे ना उलझो प्यार को, प्यार का कोई नाम नही
प्यार तो कुदरत की देन है, जिस का कोई जवाब नही
विशाल दिल है मेरा, उस मे सभी रहेते है
करते है जो नफरत मुजसे, वो भी उसी मे रहते है
निभाएगे प्यार सदा, यह वादा हम करते है
प्यार तुम करो मुझसे, यह जरुरी नही
प्यार तो प्यार है कोई समजोता नही
रिश्तो मे ना उलझो प्यार को, प्यार का कोई नाम नही
प्यार तो कुदरत की देन है, जिस का कोई जवाब नही
विशाल दिल है मेरा, उस मे सभी रहेते है
करते है जो नफरत मुजसे, वो भी उसी मे रहते है
Saturday, May 19, 2007
जन्म दिन
जन्म दिन है मेरा मनाओ ख़ुशी या गम
अफ़सोस है इस बात का साल एक हुआ है कम
मत कर अफ़सोस कहता है मनु
अनुभव बड़ा है साल का क्या ये है कम
और वरिष्ठो कि कतार मे आगे बडे है हम
अफ़सोस है इस बात का साल एक हुआ है कम
मत कर अफ़सोस कहता है मनु
अनुभव बड़ा है साल का क्या ये है कम
और वरिष्ठो कि कतार मे आगे बडे है हम
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