Sunday, October 14, 2007

माँ कि याद

चाहत है बस माँ के प्यार कि
जलती तपती दुप मे माँ के आचल कि
मस्ती भरे पलों मे माँ के गोद कि
सोचा था सेवा करूगा माँ कि
दौलत कि दौर मे भूल गया माँ को
आया जब होश तो न पाया माँ को
काश एक भर वक़्त पीछे चले जाए
काश एक बार मे बचा बनू
एक बार फिर माँ के आचल से खेलु
अरज है इतनी प्रभु तुम से मेरी
पल भर लौटा दो माँ मेरी
माँ के गोद मे निकले आखरी सास मेरी

Saturday, October 6, 2007

जनम दिन का तोहफा

 जन्म दिन है तुम्हारा 
क्या तोहफा दे तुम को
हाथ उठाकर बस 
यह दुआ हम करते है

कभी गम का साया न आये तेरे द्वार
तेरी गलियों से भी रहे दुःख दूर
तेरे आगन मे हो खुशियों कि बाहर
यह दुआ हम करते है

कभी कांटा न लगे पाव मे तेरे
फूल खिले वही पर जहा पड़े कदम तेरे
सदा बहारों का मौसम रहे शहर मे तेरे
यह दुआ हम करते है

चाहेरा जैसे मासूम तेरा
वैसे मासूम हो दिल तेरा
हर पाप से रहे परे मन तेरा
यह दुआ हम करते है

जितनी भी हो जिन्दगी तुम्हारी
हर आरजू हो पूरी तुम्हारी
न रहे कमी जीवन मे तुम्हारी
यह दुआ हम करते है

नाम रहे सदा जग मे तेरा
हर दिल मे रहे प्यार तेरा
हर घर मे हो चर्चा तेरा
यह दुआ हम करते है

भूले से भी अगर आये तूफान
माँ शक्ति दे तुझे इतनी
टकरा कर तूफान भी मोड़ ले रास्ता
यह दुआ हम करते है

दुआ करो तुम भी प्रभु से इतनी
कबूल हो दुआ मेरी
मेरी दुआ का असर हो तुम पर
यह दुआ हम करते है

Saturday, September 29, 2007

माँ


मैंने पूछा बाग़ से माँ क्या है
बाग़ ने कहा माँ एक एसा गुलशन है
जिसका कोई जवाब नही

मैंने पूछा समुन्दर से माँ क्या है

समुन्दर ने कहा माँ एक एसी सीप है
जो सीने मे हजारो राज छिपाये हुए है

मैंने पूछा सूरज से माँ क्या है
सूरज ने कहा माँ एसा ब्रह्माण्ड है
जिसके आगे मे कुछ भी नही


मैंने पूछा इश्वर से माँ क्या है
इश्वर ने कहा माँ एक एसा वरदान है
जो दुनिया मे सबसे माहान है।

मैं पूछा अपने दिल से माँ क्या है
दिल ने कहा माँ ज़िन्दगी का एसा सच है
जिसके सिवाए ज़िन्दगी कुछ भी नही है

Sunday, September 16, 2007

हर हाल मे जीना है - 1

हमे तो हर हाल मे जीना है
चाहे आस्मान जूक जाए
या जमीन फट जाए
हमे तो हर हाल मे जीना है

जीवन दुखों का सागर है
सागर मे गोता खाना है
सामने है किनारा
तर के पर उतरना है
हमे तो हर हाल मे जीना है

न डरे हम अंधेरो से
सवेरा तो होना है
बस एक रात कि दुरी है
सूरज को तो निकलना है
हमे तो हर हाल मे जीना है

न दोष दे किस्मत को
रास्ता हमने खुद चुना है
चीर के हर मुसीबत को
मंजिल अपनी पानी है
हमे तो हर हाल मे जीना है

Monday, August 6, 2007

हमारा जीवन - भाग २

जैसे अगले अंक मे अपने आप को खुश रखने कि बात कि थी, हम खुश होगे तो किसी के सहारे बन सकेगे इसीलिये हमेशा मुश्क्रते रहेना है। मुश्क्रता हुआ चाहेरा हमेशा गुलाब कि तरह खिला रहेता है, जैसे कि रोता हुआ बचा भी कोई खिलाना नही चाहता, वैसे ही एक उदास और रोते हुए से सभी कतराते है। अपना दुःख दर्द दुनिया समाज नही सकेगी, उसे मजाक बनके हसेगी।
किशोर जी ने एक गीत मे कहा है।

जो तुम हसोगे तो दुनिया हसेगी
रोइगी तुम तो न रोइगी दुनिया
न रोइगी दुनिय;
तेरे आसुओ को समाज न सकेगी,
तेरे आसुओ पे हसेगी ये दुनिया
हसेगी ये दुनिया।

हमे जीना है, फिर हम हस्के जीए या रोके , हर हाल मे हमे जीना है , फिर कियो न हस्के जीए । अपनी हसी गुलाब कि तरह हर जगह फहेलादे ।

दिन कि शरुआत अगर मुस्कराने से हो तो पुरा दिन खुसी से बीत इसीलिये जब हम नीद से जागें तो मुस्क्रके उठे । मुस्कराते चहरे तो दर्पन मे देखे, अपने आप को मुश्क्रते देख कर, शारीर मे अजीब सी शक्ति उत्पन होगी । इस शक्ति को बहार निकलना है ।

अगले भाग मे

Saturday, August 4, 2007

हमारा जीवन

हमारा जीवन बहुत ही संघर्ष से भरा है, बचपन से लेकर समय बड़ा कठिन है, जीने हमे सरल बनाना है, जीवन मे दुःख सुख आते रहेते है पर दुखो को लेकर अपना जीवन नस्ठ न करे। हम इस धरती पर आये है तो उसका कोई मकसद तो होगा। हर कोई किसी न किसी मुक्साद को लेकर याहा आया है। हमे अपने आप को पहेचन ना है, हमे किया करना है , हमारे जो रस्ते मे काटे है उसे निकलना है, और आगे बढ़ना है। परेशानेयो को लेकर परेशां न न होकर रास्ता निकलना है।

सबसे पहेले हमे अपने आप को खुश रखना है, हम खुश रहेगे तो हम अपने जीवन का दियेये खोज सकेगे।

अगले अंक मे

Thursday, July 19, 2007

खुशिया

धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे
दिल मे हो दर्द फिर भी खुशिया मनायेगे

खिलायेगे फूल जगह जगह
न खिले फूल तो काटो को सहेलायेगे
कागज़ के फूलो से खुश्ब्हू हम फहेलायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे

खली हाथ आयेथ न जायेगे खली हाथ
दामन खुशियोका भर के ले जायेगे साथ
बातेगे खुशिया जनत मे , नरक को स्वर्ग बनायेगे
धुप हो या छाव हम सदा मुस्क्रयेगे