Thursday, July 22, 2010

मुझे जीने दो 

तेरी कोख मे पल रही हु माँ 
मुझे इस दुनिया मे आने दे

मै तो निर्जीव थी
जीवन दिया तुने मुझे
अपने खून से है सीचा मुझे
मुझे इस दुनिया मे आने दे

देखती  हूँ दुनिया तेरी आँखों से 
महेसूस करती  हूँ तेरी बातो से
यह  दुनिया बढ़ी  खुबसूरत है
मुझे इस दुनिया मे आने दे

न मैंने कोई पाप किया
न तुने कोई पाप किया
तेरे प्यार की सौघात हूँ मै
मुझे इस दुनिया मे आने दे

न कर त्याग मेरा
ज़माने के तानो से
सामना तो करना होगा सारे जहा से 
मुझे इस दुनिया मे आने दे

आउंगी जब मे इस दुनिया मे
तेरा अंचल खुशियों से भर दुगी 
सोई हुई ममता को मै  फिर से जगा दूंगी 
मुझे इस दुनिया मे आने दे


तेरी कोख मे पल रही हु माँ 
मुझे इस दुनिया मे आने दे 



Saturday, March 13, 2010

क्या है पहेचन मेरी

कौन हूँ मै
क्या है पहेचन मेरी

बेटी हूँ मै कीसीकी
बहू मै कीसीकी
राखी बंधकर
बन गयी बहेन कीसीकी
क्या है पहेचन मेरी

सात फेरे लेकर
हो गयी पत्नी कीसीकी
दूध पिलाकर
हो गयी माँ कीसीकी
क्या है पहेचन मेरी

जनम लेते ही
मीला बाप काम नाम
हूई शादी तो मीला
पती काम नाम
क्या है मेरी पहेचन

जानते है सब मुझे
रिश्तो के नाम से
मेरा कोई नाम नहीं
क्या है पहेचन मेरी

बदल रहा है अब ज़माना
उड़ रही हूँ मई अब आकाश
मेने भी कदम रखा है चाँद पर
हो रहा अब नाम मेरा
होगी अब पहेचन मेरी

खेल हो या हो जंग काम मैदान
घर हो या दफ्तर
हर जगह सफल हूई हूँ मै
हो रहा है अब नाम मेरा
होगी अब पहेचन मेरी

नहीं अफ़सोस अब मुझे
नारी होने काम है गर्व मुझे
नाम है जग में जिनका
सब की जननी हूँ मै
येही है पहचान मेरी
येही है पहचान मेरी

Monday, March 1, 2010

क्यों जनम लिया हमने

क्यों जनम लिया हमने
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

बचपन बीत गया खेल कूद में
जवानी बीत रही है दल रोटी के चाकर में
बुढ़ापा बीतेगा दावा दारू में
येही जीवन है तो
क्यों जनम लिया हमने
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

चहेरा कितन सुन्दर है
यह आइना कहता है
मन कितना मैला है
यह हम जानते है
न धो सके मन की मेल को तो
क्यों जनम लिया हमने
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

हर तरफ है खून की नदिया
हर पल इंसानियत काम खून करते है
जानवरों से भी बदतर है जीवन
न बन सके इन्सान तो
क्यों जनम लिया हमने
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

न बन सके हम राम
न बन सके हम लखन
महात्माओ के आदर्शो को धो कर पि गए हम
सच की रह पर न चल सके तो
क्यों हमने जनम लिया
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

सब धर्मो काम एक ही सर
अल्लाह इश्वर सब एक ही नाम
फिर भी धर्म के नाम पर लड़ते है
है इश्वर भी हैरान
क्यों जन्म दिया इन्सान को
कभी कभी मेरे दिल में सवाल आता है

Thursday, February 25, 2010

मेरा धफ्तर

घर से भी ज्यादा वक़्त गुजरा है दफ्तर में
भूल जाते है घर को आकर हम  दफ्तर में

भिन भिन  प्रान्त के है साथी
हर भाषा यहाँ बोली जाती
जैसे भारत की छबी है दफ्तर में
भूल जाते है घर को आकर हम दफ्तर में

जन्म  दीन हो या हो प्रमोशन
या  छा  जाये कभी ख़ामोशी
हर पल साथ गुजरा है दफ्तर में
भूल जाते है घर को आकर हम दफ्तर में

न कोई  रंजीश  न  कोई  गिला
इक डाली  के है  फूल सभी
तबी  तो  गर्व  हम  कहते  है
बैंक  ऑफ़  बरोदा  है  हमारा  दफ्तर
भूल जाते है घर को आकर हम दफ्तर में

Saturday, December 26, 2009

कैसा है मीत मेरा
ऐ हवाओ कुछ तो बताओ
होकर आयी हो उनकी गलियों से

धड़कता है जैसे दील मेरा
याद करके उनको
धक् धक् करता होगा दील उनका
ऐ हवाओ कुछ तो बताओ
होकर आयी हो उनकी गलियो से

नीद नहीं आती रातो में
करवटे बदलते है रातो में
वो भी तो गिनती होगी तारे रातो में
ऐ हवाओ कुछ तो बताओ
होकर आयी हो उनकी गलियो से

कुछ दीनोकी है यह दूरी
कुछ है मजबूरी
मिलेगे फीर हम तुम
नहीं रहेगी फीर दूरी
ऐ हवाओ तुम बताना उनको
जब वापस गुजरो उनकी गलियो से

Monday, September 7, 2009

जब इरादा हो पक्का

नही पाव जमीन पर मेरे
छू लुंगी आसमान आज
आशियाना होगा चाँद सितारों में
जब इरादा हो पक्का

न डारूंगी तूफानों से
साथी है तूफ़ान मेरे
होगी रौशनी अंधेरो में
जब इरादा हो पक्का

न रुकुंगी थककर रस्ते में
चाहे चुबे कटे पग में
फूल बंजायेगे कांटे भी
जब हो इरादा पक्का

याद करेंगे सभी मुझे
करोंगी ऐसा काम
होगा दुनिया में नाम मेरा
जब हो इरादे पक्के

jab irada ho pakka